विधानसभा के बाहर सत्ता पक्ष-विपक्ष में नारेबाजी, राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत और पंचायती राज चुनाव को लेकर आमने-सामने

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर में सियासी माहौल गरमा गया। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी हुई।

इसी बीच पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर भी भाजपा विधायक दल ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव अभी तक नहीं करवाए गए हैं।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष ने राष्ट्रगान का कोई अपमान नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राष्ट्रगीत गाने को लेकर बनाए गए कानून का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के बाद जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव नहीं होने के कारण जिला प्रशासन ही जिला परिषद की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार से जवाब मांग रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनके अधिकार देने की मांग कर रही है।

वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सदन चलाना चाहती है और कांग्रेस विधायक भी चाहते हैं कि विधानसभा में महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भ्रष्टाचार, पेपर लीक और महंगी चीनी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के जो भी मुद्दे हैं, उन्हें सदन के भीतर उठाया जाना चाहिए तथा विधानसभा की परंपराओं और मर्यादाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा परिसर में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का मुद्दा भी सियासी टकराव का केंद्र बना रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष की नारेबाजी के बीच विधानसभा परिसर में माहौल काफी गरमाया रहा।

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